कैसे बिहार के इस शख्स ने कबाड़ के धंधे से शुरुआत कर बनाई देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी

दुनिया में अधिकतर लोग सिर्फ सपने देखते हैं, लेकिन उसे पुरा करने के लिए कभी कदम नहीं उठाते | वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो अपने सपनों को पुरा करने के लिए किसी भी हदतक चले जाते हैं और उसे कभी न कभी जरूर पा लेते हैं | आज की हमारी कहानी भी कुछ ऐसे ही शख्सियत की है जिन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कबाड़ के व्यापार से एक छोटी शुरुआत की और देखते ही देखते कुछ ही सालों में बना दी देश की सबसे बड़ी धातु और खनन कंपनी | आज उनका व्यापार भारत के अलावा दुनियाभर के लगभग सभी बड़े देशों में फैला हुआ है और वे देश के सबसे अमीर लोगों में से एक माने जाते हैं |

जी हाँ दोस्तों, हम बात कर रहे हैं देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी वेदांता रिसोर्सेज के मालिक अनिल अग्रवाल की, जिनका जन्म राजधानी पटना के एक समृद्ध मारवाड़ी परिवार में हुआ था । उनके पिता शहर के एक प्रसिद्ध व्यापारी थे जो एल्युमीनियम कंडक्टर के व्यवसाय से जुड़े थे | अनिल भी अपने पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहते थे, जिसके कारण उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और व्यापार की तलाश में मुंबई आ गए | शुरुआत में उन्होंने धातुओं के कबाड़ को इकट्ठा कर शहर में बेचना शुरू कर दिया और देखते ही देखते व्यापार बढ़ने लगा |

उन्होंने अपने व्यापार को और अधिक बढ़ाने के लिए कई छोटी बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण भी किया, जिसके कारण आज उनकी कंपनी वेदांता रिसोर्सेज देश की सबसे बड़ी खनन और धातु निर्माता कंपनी बन चुकी है | आज यह सीसा, चांदी, लोहा, एल्युमीनियम, जिंक, ताम्बा और स्टील जैसे प्रमुख धातुओं का सबसे बड़ा उत्पादक है जो दुनियाभर के कई दुसरे देशों में निर्यात भी करती है | पिछले साल कंपनी का कुल राजस्व 86,000 करोड़ से भी अधिक था | अधिकांश राजस्व भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन देशों से आता है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी खनन कंपनियों में से एक बनाती है |

धातु और खनन उद्योग में सफल होने के बाद उन्होंने कई दुसरे व्यवसाय में भी कदम रखा | देश में ऊर्जा की खपत को देखते हुए उन्होंने बिजली उत्पादन पर जोर दिया, जिससे लोगों को सस्ती दरों पर चौबीसों घंटे बिजली मिल सके | आज उनकी कंपनी वेदांता रिसोर्सेज भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक मानी जाती है जो ऊर्जा, पेट्रोलियम, गैस, धातु और खनन जैसे सभी व्यवसायों में प्रमुख है और 30,000 करोड़ की निजी संपत्ति के साथ अनिल अग्रवाल देश के सबसे अमीर लोगों में शामिल हो चुके हैं |

व्यापार में सफल होने के बाद उन्होंने अपना पुरा ध्यान समाज कल्याण पर लगाया और गरीबों कि मदद के लिए स्कूल, कॉलेज, लाइब्रेरी और अस्पताल बनवाए | उन्होंने अपने जीवन में जो भी कमाया अब उसे समाज को लौटाना चाहते हैं, जिसके कारण वे अपनी निजी संपत्ति का एक बड़ा भाग पहले ही दान करने की घोषणा कर चुके हैं | आज उन्हें देश के सबसे बड़े दानवीर के नाम से भी जाना जाता है और आने वाले समय में उनकी इच्छा है की जो पढ़ाई लोग विदेश जाकर करते हैं, उसी तरह का माहौल भारत में भी होना चाहिए, जिससे आम लोग भी उच्च शिक्षा आसानी से हासिल कर सके |

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